Saturday, 13 July 2019

ज़िंदगी का सफ़र


ज़िंदगी का समंदर 

समंदर ये जिन्दगी का बड़ा विशाल है,
इसमें उतारनी अपनी नाव
यह भी कहाँ आसान हैं?
हर तरफ घना अँधेरा छाया हुआ,
साहिल-ए- मंजिल का ना अता पता है|
दूर तलक नजरें फेरे,
फिर भी किनारा मिलना
एक मुश्किल सवालात है|
मंजिल तलाशते रास्ता भटक जाते
कभी इस ओर तो कभी उस ओर चले जाते,
ढूँढते-ढूँढते अपने मंजिल को
थके हारे मुसाफिर फिर चल पड़ते |
इस समुद्र की लहरें कभी उमड़ पड़ती
कभी पत्थरो से टकरा ये जाती|
गहराई इसकी जो नापी ना जा सके
जिसमे सम्भल के हैं बहुत चलना|
कुछ जो डरकर रुक जाते हैं इसी किनारे पे,
कुछ ऐसे भी जो अपनी ज़िद से कूद इसमें जाते|
जो बैठा है इस किनारे पर,
वही गवाह है उन मुसाफिरों का|
कौन तैर के मंजिल को पायेगा
किसकी हस्ती यह समन्दर मिटाएगा?
                                                                                  
                                                                                           -प्रिया


Thursday, 11 July 2019

कौन है वो?


मेरे होंठों की मुस्कान की असली वजह है वो,
मेरे दिल की धड़कन की असली आहट है वो|
मेरी वीरान राहों की असली मंजिल है वो,
मेरी उदास आँखों का साहिल है वो|
वो साथ है तो दुनिया हसीन सी लगने लगती है,
खूबसूरत सी, अपनी सी लगने लगती है|
ठंडी रात में मीठा सपना है वो,
इस बेगानी दुनिया में बस मेरा अपना है वो|
दिल चाहे बस उसका हाथ थामे रखूं,
यह दो दिलों का प्यारा सा बंधन बांधे रखूं|
उसी से मेरी सुबह होती उसी से मेरी रात,
कौन है वो


मेरे होंठों की मुस्कान की असली वजह है वो,

मेरे दिल की धड़कन की असली आहट है वो|
मेरी वीरान राहों की असली मंजिल है वो,
मेरी उदास आँखों का साहिल है वो|
वो साथ है तो दुनिया हसीन सी लगने लगती है,
खूबसूरत सी, अपनी सी लगने लगती है|
ठंडी रात में मीठा सपना है वो,
इस बेगानी दुनिया में बस मेरा अपना है वो|
दिल चाहे बस उसका हाथ थामे रखूं,
यह दो दिलों का प्यारा सा बंधन बांधे रखूं|
उसी से मेरी सुबह होती उसी से मेरी रात,
मेरी हर बात में होती बस उसी की बात|
जन्नत सी मिल जाती है जब पास मेरे वो होता है,
बिन उसके सब कुछ कोरा कोरा सा होता है|
मेरे जीने की एक आखिरी आस है वो,
इस बेगानी दुनिया में मेरा ख़ास है वो|
                                                           

                                                                                                 -प्रिया


जन्नत सी मिल जाती है जब पास मेरे वो 

ज़िंदगी का सफ़र

ज़िंदगी का समंदर  समंदर ये जिन्दगी का बड़ा विशाल है, इसमें उतारनी अपनी नाव यह भी कहाँ आसान हैं? हर तरफ घना अँधेरा छाया हुआ, साह...